राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के प्रमुख मोहन भागवत ने 20 अक्टूबर 2026 को नागपुर में संघ के 101वें स्थापना दिवस और विजयादशमी के वार्षिक उत्सव पर संदेश देते हुए हिंदू चेतना को समावेशी बताया जो धर्म, खान-पान या राजनीतिक विचारधारा से बंधी नहीं है,समाज में एकता और समरसता बनाए रखने पर जोर दिया,विरोध प्रदर्शनों का इस्तेमाल राजनीतिक हितों या देश में अस्थिरता पैदा करने के लिए नहीं होना चाहिए और सभी को संवैधानिक सीमाओं का सम्मान करना चाहिए,उन्होंने युवाओं से नशे की समस्या से दूर रहने और डिजिटल सामग्री के सही उपयोग के प्रति जागरूक रहने की अपील की।
संघ प्रमुख मोहन भागवत ने रिजीम चेंज पर बोलते हुए कहा कि भारत में सत्ता परिवर्तन नहीं होगा,उन्होंने फ्रांस, नेपाल, बांग्लादेश और अल्बानिया जैसी घटनाओं का जिक्र करते हुए कहा कि केवल सरकारें बदलने से किसी देश की समस्याएं हल नहीं होतीं,उन्होंने चेताया कि पश्चिम की ओर से एक ऐसी आंधी आ रही है जो संस्कृति, व्यवस्था और सुरक्षा के खिलाफ नफरत फैलाना चाहती है,भारत की प्रगति को रोकने के लिए कुछ ताकतें अराजकता फैलाने की कोशिश कर रही हैं।
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