नई दिल्ली: भारत और रूस की ‘रणनीतिक साझेदारी’ (Strategic Partnership) की 25वीं वर्षगांठ है,प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति पुतिन ने संयुक्त बयान जारी कर साफ कर दिया है कि यह रिश्ता ‘विश्वास और आपसी सम्मान’ की उस नींव पर खड़ा है,जिसे कोई हिला नहीं सकता,अर्थव्यवस्था के मोर्चे पर पीएम मोदी और पुतिन ने जो फैसला लिया है,उससे डॉलर की बादशाहत को सीधा चैलेंज है,23वें भारत-रूस शिखर सम्मेलन में पीएम मोदी और राष्ट्रपति पुतिन ने ऐतिहासिक ‘संयुक्त बयान’ जारी किया,दोनों देशों ने 2030 तक 100 अरब डॉलर के व्यापार और नेशनल करेंसी में सेटलमेंट का लक्ष्य रखा है,रक्षा क्षेत्र में ‘मेक इन इंडिया’ के तहत सह-उत्पादन और टेक्नोलॉजी ट्रांसफर पर सहमति बनी, रूस ने UNSC में भारत की दावेदारी का समर्थन किया और आतंकवाद के खिलाफ ‘जीरो टॉलरेंस’ की प्रतिबद्धता दोहराई,दोनों नेताओं ने 2030 तक द्विपक्षीय व्यापार को 100 अरब डॉलर (USD 100 Billion) तक ले जाने का लक्ष्य रखा है, लेकिन सबसे बड़ी बात यह है कि यह व्यापार डॉलर में नहीं, बल्कि ‘नेशनल करेंसी’ (रुपये और रूबल) में होगा।
संयुक्त बयान के पैराग्राफ 13 में साफ लिखा है कि दोनों देश अपने नेशनल पेमेंट सिस्टम्स को एक-दूसरे से जोड़ने पर काम करेंगे, भारत का UPI और रूस का MIR या अन्य सिस्टम एक साथ काम करेंगे, इससे बिना किसी रुकावट के व्यापार होगा, भारत और रूस अब मल्टीपोलर वर्ल्ड के सबसे बड़े आर्किटेक्ट बन चुके हैं,दोनों नेताओं ने साफ किया कि दो बड़ी शक्तियों के रूप में, उनकी यह साझेदारी वैश्विक शांति और स्थिरता के लिए एक एंकर की तरह है।
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