आज शारदीय नवरात्र का पावन पर्व शक्ति की आराधना के साथ शुरू हो गया है, यह केवल एक व्रत या त्योहार की शुरुआत नहीं, बल्कि सकारात्मकता और नई ऊर्जा का प्रतीक है,आश्विन शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि को पड़ने वाले पहले दिन मां दुर्गा के प्रथम स्वरूप मां शैलपुत्री की पूजा की जाती है,इस दिन से नौ दिनों तक चलने वाले शक्ति और उपासना के महापर्व की शुरुआत होती है तथा घरों और मंदिरों में घटस्थापना (कलश स्थापना) की जाती है।

नौ दिनों तक चलने वाले इस उत्सव में माता के नौ अलग-अलग स्वरूपों की पूजा की जाती है,शारदीय नवरात्र के पहले दिन का धार्मिक,आध्यात्मिक और सांस्कृतिक रूप से बहुत महत्व होता है,मां शैलपुत्री स्थिरता, दृढ़ता और प्रकृति का प्रतीक हैं इनकी पूजा करने से जीवन में साहस,स्थिरता और धैर्य आता है, आश्विन मास की प्रतिपदा से ऋतु परिवर्तन भी होता है, यह समय शारीरिक और मानसिक शुद्धि के लिए सबसे उत्तम माना जाता है।
पर्वतराज हिमालय की पुत्री माता पार्वती को शैलपुत्री भी कहा जाता है, मान्यता है कि इस दिन से कुछ भक्त नौ दिन का व्रत रखते हैं तो कुछ प्रतिपदा और अष्टमी तिथि का व्रत करते हैं, विधि-विधान और श्रद्धा से मां शैलपुत्री की पूजा करने से जीवन में सुख-शांति, साहस और समृद्धि का आशीर्वाद मिलता है।
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