कहते हैं जहां चाह,वहां राह इसे बागपत विजय कुमार शर्मा ने यह साबित कर दिया, 26 बार असफल होने के बाद 59 साल की उम्र में विजय कुमार ने टीचर बनकर साबित कर दिया की लगातार मेहनत करने से आपको आपकी मंजिल जरुर मिलती है,विजय कुमार शर्मा ने इस साल उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग की ओर से आयोजित टीजीटी परीक्षा में सफलता हासिल की,उनका चयन संस्कृत शिक्षक के पद पर हुआ है।
प्राइवेट स्कूल में लगभग चार दशक तक पढ़ाने के बाद अब वह सरकारी सहायता प्राप्त स्कूल में सहायक शिक्षक के रूप में अपनी नई जिम्मेदारी संभालेंगे,विजय शामली जिले के इंटर कॉलेज आइलम में छात्रों को संस्कृत पढ़ाएंगे, विजय शर्मा ने 1987 में ग्रेजुएशन पूरा किया और इसके बाद हिंदी तथा संस्कृत में पोस्ट ग्रेजुएशन की पढ़ाई की,वर्ष 2003 में उन्होंने बीएड की डिग्री भी हासिल और सरकारी शिक्षक की भर्ती परीक्षाओं में लगातार हिस्सा लिया। कई बार लिखित परीक्षा पास करने के बावजूद इंटरव्यू में उनका चयन नहीं हो सका,परिवार ने जब उनसे परीक्षाएं देना बंद करने को कहा तब भी उन्होंने अपनी कोशिश जारी रखी,आखिरकार इस बार संस्कृत शिक्षकों के 292 पदों पर भर्ती निकली थी,इस बार उन्होनें अपनी योग्यता साबित कर सरकारी शिक्षक बनने में सफल हो गए।
हालांकि विजय की उम्र 59 साल से अधिक है और रिटायरमेंट की उम्र 62 वर्ष होने के कारण उन्हें सरकारी स्कूल में करीब दो साल से कुछ अधिक समय तक पढ़ाने का अवसर मिलेगा।
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