आज देशभर में भाई बहन के अटूट प्रेम का पर्व रक्षाबंधन धूमधाम से मनाया जा रहा है, आज के दिन एक बहन भाई की कलाई पर रक्षासूत्र बांधती है, और वह भाई की दीर्घायु, यश और सुख-समृद्धि के लिए ईश्वर से प्रार्थना करती है।
हिंदू पंचांग के अनुसार, रक्षाबंधन का त्योहार हर साल श्रावण मास (सावन) की पूर्णिमा तिथि को मनाया जाता है, सनातन धर्म में रक्षाबंधन केवल एक लौकिक (सांसारिक) त्योहार नहीं है,बल्कि यह आत्मा से आत्मा का दिव्य संबंध है,सनातन संस्कृति में रक्षाबंधन केवल सूत का धागा नहीं, बल्कि एक रक्षा-कवच है।
भविष्य पुराण के अनुसार, जब देवराज इंद्र असुरों से पराजित होने लगे, तब इंद्राणी (शची) ने मंत्रोच्चार के साथ देवराज की कलाई पर ‘रक्षासूत्र’ बांधा था, जिससे उन्हें विजय प्राप्त हुई, वहीं द्वापर युग में महाभारत के समय भगवान श्रीकृष्ण की उंगली सुदर्शन चक्र से घायल हुई, तब द्रौपदी ने बिना एक क्षण गंवाए अपनी साड़ी का आंचल फाड़कर प्रभु की उंगली पर बांध दिया, श्रीकृष्ण ने इस ‘प्रेम के धागे’ को अपना सर्वस्व मान लिया और चीरहरण के समय अनंत वस्त्र बनकर द्रौपदी की लाज और सम्मान की रक्षा की।
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